अधिकारियों की लापरवाही से युवती ना ससुराल जा पा रही ना मायके, वन स्टॉप सेंटर में अंजान के बीच रहने को है मजबूर

संवाददाता – प्रकाश सिंह की रिपोर्ट

ग्वालियर। बाल विवाह के शक में शादी के मंडप से सीधे थाने लाई गई दुल्हन अभी भी वन स्टॉप सेंटर में अपना दिन काट रही है। सरकारी अफसरों की लापरवाही के चलते आज 9 दिन बीत जाने के बाद भी युवती अंजान लोगों के साथ रह रही है। उम्र का निर्धारण न हो पाने के कारण युवत न ही अपने मायके जा पा रही है और न ही ससुराल।

दरअसल बाल विवाह की शिकायत के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी बीते 8 जुलाई को नदी पार टाल में एक शादी में पहुंच गए। इस दौरान विदाई होने ही वाली थी कि पुलिस दुल्हा और दुल्हन को थाने ले आई। परिजनों से दुल्हा-दुल्हन के उम्र का प्रमाण मांगने के बाद वे कोई सबूत नहीं दे पाए। इसके बाद पुलिस ने उनका मेडिकल टेस्ट कराया जिसमें उनकी उम्र 17 से 18 प्लस माइनस वन बताई गई। इसका मतलब ये स्पष्ट नहीं हो सका है कि दुल्हन बालिग है या नाबालिग।

कारणवश दुल्हन को वन स्टॉप सेंटर भेज दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया में महिला एवं बाल विकास विभाग और महिला सशक्तिकरण अधिकारी की गंभीर लापरवाही सामने आई है। पूरी प्रक्रिया में जेजे एक्ट का भी पालन नहीं किया गया। एक्ट में ऐसे मामलों की जानकारी 24 घंटे में बाल कल्याण समिति को देनी होती है लेकिन इसका भी पालन नहीं हुआ।

समिति ने 11 जुलाई को मीडिया रिपोर्ट को आधार बनाकर पुलिस और वन स्टॉप सेंटर प्रभारी को नोटिस देकर पीड़िता को समिति के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए लेकिन इसको भी सभी ने हवा में उड़ा दिया। और दुल्हन की सही उम्र का पता लगाने के लिए उसे अभी तक मेडिकल बोर्ड के सामने पेश नहीं किया जा सका है।

जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी शालीन शर्मा ने कहा कि हमने लोक अभियोजक से अभिमत लिया था चूँकि पहली मेडिकल रिपोर्ट में आयु स्पष्ट नहीं थी इसलिए अब दुल्हन को मेडिकल बोर्ड के सामने आज पेश किया जा रहा है। एक दो दिन में रिपोर्ट आ जाएगी और यदि दुल्हन नाबालिग निकलती है तो उसे बालिका गृह में ही रहना होगा और उसके परिजनों के खिलाफ बाल विवाह कानून के तहत मुकदमा चलेगा और उनकी गिरफ़्तारी होगी।

बहरहाल जो प्रक्रिया 9 दिन बाद अपनाई गई उसे जल्दी पूरा कर लिया जाता। इससे स्पष्ट होता है मामला चाहें कितना भी गंभीर या संवेदनशील हो सरकारी अधिकारी अपना रवैया नहीं बदल सकते।