दशहरे पर रोशनी से सराबोर हुआ मैसूर, सन् 1610 से मनाया जा रहा है विजयादशमी पर्व… देखें तस्वीर

मैसूर । कर्नाटक का मैसूर शहर दशहरे के सेलिब्रेशन के लिए रोशनी से सराबोर हो गया है। यहां 409 साल से दशहरे पर सजे-धजे हाथियों की भव्य सवारी निकालने की प्रथा है। मैसूर में 1610 में पहली बार दशहरा मेला आयोजित किया गया था। कर्नाटक में दशहरा प्रादेशिक त्योहार के तौर पर भी मनाया जाता है।

इस बार भी जम्बो सवारी मंगलवार को मैसूर पैलेस से निकाली जाएगी। इसे देखने के लिए देश-विदेश से एक लाख से ज्यादा पर्यटक मैसूरू पहुंचे हैं। मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा परिवार और मंत्रिमंडल के साथियों के साथ आज करीब 3 बजे मैसूर पहुंचेंगे। शाम को कार्यक्रम का उद्धाटन करेंगे।

मुख्यमंत्री मैसूर पैलेस के बलराम गेट के सामने नंदी द्वार पर पूजा भी करेंगे। इस मौके पर मैसूर का शाही परिवार अपनी आराध्य देवी चामुंडेश्वरी पर फूलों की वर्षा करेगा। देवी को हाथी अर्जुन की पीठ पर एक सोने के हौदे में विराजमान किया जाएगा।

मेले में राज्य के सभी 30 जिलों की झांकियां होंगी। करीब 150 कलाकार प्रदर्शन करेंगे। कई झांकियां ऐसी होंगी, जिनमें केंद्र-राज्य सरकारों के कार्यक्रमों, सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों का प्रदर्शन किया जाएगा।

मैसूर जाने-आने वाले राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग पर एक दिन पहले ही वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। बड़ी संख्या में लोग शहर पहुंचे रहे हैं। मैसूर और उसके आसपास के ज्यादातर होटल फुल हो गए हैं।