धान खरीदी के लिए नियुक्ति पर लाखों की कमीशन खोरी, मामला क्या है पढ़िए पूरी खबर…

कांकेर। जिले से 150 किमी दूरी पर स्थित बांदे क्षेत्र में कोई नियम कानून लागू नही है। ऐसा देखने को मिल रहा है, मामला है आदिम जाति सहकारी समिति बांदे की जहाँ ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ लोगो द्वारा धान फड़ नियुक्ति को लेकर लाखो रुपये एटे गए, और फर्जी तरीके से रातों रात अपने लोगो का नियुक्ति भी कर दिया गया, जिसकी जानकारी आदिम जाति सहकारी समिति बांदे के अध्यक्ष को तक नही जानकारी मिली कि सालो से बांदे क्षेत्र में धान फड़ की नीलामी होती है। जो रासुकदार और धान फड़ की नीलामी में ऊंची बोली लगा पाता है।

उसी को फड़ मिल जाता है बांदे क्षेत्र में हर नियम कानून दम तोड़ देता है। अगर शिकायत के बाद औपचारिकता पूरी करने के लिये कोई जाँच टीम बांदे तक पहुँच भी जाती है। तो धान फड़ की नीलामी से कमाए गए नोटो से उनका भी मुँह बंद कर वापस भेज दिया जाता है, जाँच के नाम पर शिकायत कर्ताओ को झुनझुना पकड़ा दिया जाता है, शिकायत कर्ताओ का कहना है कि पिछले साल डिफाल्टर हुए लोगो तक को फड़ मिल गया।

नियम विरुद्ध कई लोगों को फड़ मिल गया और जब शिकायत की गई तो, यहाँ पर जांच के नाम पर लीपापोती की जा रही है, एक ओर जहां पूरे प्रदेश में धान खरीदी को लेकर देरी की वजह से किसान परेशान है वही दूसरी ओर फड़ से कमाने की उम्मीद से लोग लाखो का बोली देकर फड़ ले रहे है, इन चंदे के पैसों की वसूली कही न कही किसानों से लूटा जायेगा जो हर संबंधित अधिकारियों के सामने होगा और गरीब किसान खामोश हो कर ये तमाशा देखते रहेंगे, ये अंधेर नगरी काना राजा का माहौल बना बांदे क्षेत्र में बना हुआ है।