वृद्धा अवस्था में जब अपनों ने छोड़ा साथ, तो परायो ने एक-दूसरे का दामन थाम फिर से जीना शुरू किया

गरियाबंद । नगर से लगे हुए ग्राम भिलाई में पिछले कुछ समय से सियान सेवा सदन का संचालन हो रहा है वर्तमान में यँहा पर लगभग 17 बुजुर्ग जिसमें 13 महिला और 4 पुरूष निवास कर रहे है। समाज कल्याण विभाग के सहयोग से चलने वाली इस संस्था का संचालन प्रेरक स्वयं सेवी संस्था द्वारा किया जा रहा है वर्तमान में इस पूरे सियान सदन का संचालन अधीक्षिका रोशनी गोस्वामी कर रही है। सियान सेवा सदन खासतौर पर उन बुजुर्गों के लिए है जिनका या तो इस दुनिया में कोई नहीं, मतलब जो अब अकेले हैं और उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं या फिर ऐसे जिनका परिवार तो है लेकिन किसी कारण वश उन्हें साथ नहीं रखना चाहता। मगर अपनों के द्वारा छोड़े गये या फिर परिवार नहीं होने के चलते अकेले हुए ये वृद्ध आज घर से कोसों दूर होने के बावजूद चैन की नींद सोते है।

खुद के लिये सब्जियां उगते है करते है जैविक खेती, बाकी बचे समय में महुआ एवं अन्य वनोपज का संकलन करते है –

यहां रहने वाले बुजुर्ग खुद के इस्तेमाल के लिये सब्जियां भी उगाते है सब्जी बाड़ी में काम करना इनकी दिनभर की दिनचर्या में शामिल है लगभग सभी सदस्य सुबह की नित्यक्रिया से निवृत होकर परिसर के अंदर बने खेत मे सब्जी उगाने का कार्य करते है यँहा पर देशी संसाधनों का इस्तेमाल कर जैविक खेती करते है सब्जी भाजी के अलवा परिसर के अंदर ही माड़िया,बाजरा की खेती भी करते है खेतीबाड़ी करने के बाद के बचे हुए समय मे पास के जंगल में जाकर महुआ और अन्य वनोपज का संकलन करते है इससे इन बुजुर्गों को अपने खर्चे के लिए कुछ पैसे मिल जाते है।

परिसर के अंदर ही धान संरक्षण केंद्र है जिसमे लगभग 341 किस्म के धान है संरक्षित –

सियान सेवा सदन के परिसर के अंदर ही धान संग्रहण केंद्र है जो कि पिछले कई वर्षों से संचालित है इस केंद्र में 341 किस्म के धान का संरक्षण किया गया है जिसमे से कई विलुप्त प्रजातियों के उच्च गुणवत्ता वाले धान भी है । जैसे ब्लैक राइस, रेड राइस, ग्रीन राइस जैसे उच्च गुणवत्ता वाले धान है यह धान ब्लैक राइस( केंसर जैसी बीमारी से लड़ने के लिए उपयोगी ) रेड राइस (बिस्किट बनाने के लिए) ग्रीन राइस (जिंक के लिए) आदि कई बीमारियों और अन्य कार्य के लिये इस्तेमाल में आते है।