बस्तर की संस्कृति, पर्यटक स्थल और कलाकारों द्वारा बनाए हुए मेटल के सामान बोलती हुई नजर आती है, मूर्तियां…

संवाददाता विजय पचौरी की रिपोर्ट

जगदलपुर : बस्तर की संस्कृति और सुंदरता के साथ ही यहां की कला संस्कृति को देखने और समझने वैसे तो यहां हर साल बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक बस्तर भ्रमण को आते हैं लेकिन इनमें से कुछ लोग ही बस्तर को समझ पाते होंगे लेकिन आप पूरे बस्तर का भ्रमण नहीं कर सकते क्योंकि आपके पास समय की कमी होती है।

बस्तर के आदिवासियों कलाकारों के द्वारा मेटल से बनी इन मूर्ति सामानों को देखकर आप भी हैरान जरूर होंगे यहां के कारीगरों ने जिस प्रकार से मेटल के सामान बना रखे हैं। सुंदर सुंदर मूर्तियां सजाने योग कड़ी मेहनत से बस्तर के कलाकार बनाते हैं। यह मेटल की मूर्तियां पुराने पीतल के बर्तनो को पिघला जाता है।

जो धातू निकलती है उसे मेटल कहा जाता है मोमबत्ती के सांचे में डालकर मूर्तियां बनाई जाती हैं एक एक मूर्ति को बनाने में 15 से 20 दिन तक लग जाते हैं बस्तर की यह मूर्तियां देश में ही नहीं विदेश तक जा चुकी हैं जगदलपुर के अनिल लुक्कड़ 35 सालों से इन मेटल की मूर्तियों का संग्रहालय खोल रखा है।

इनके पास तीन हजार से ज्यादा मूर्तियों के कलेक्शन हैं इस संग्रहालय में झिठकु मिटकु की मूर्ति की कीमत सबसे महंगी है 10 लाख रूपय एक हजार मूर्तियां इनके पास ऐसी है कि जो भी देखने आता है। संभवता वह इन्हें खरीद कर अपने घर ले जाना चाहता है दूरदराज से बस्तर घूमने आने वाले लोग मेटल की मूर्तियां ज्यादा पसंद करते हैं।

यदि आप बस्तर आए तो मेटल की मूर्तियों को जरूर देखें शायद आपको यह मूर्तियां इतनी पसंद आएगी कि आप इन्हें खरीदने को मजबूर हो जाएंगे।